मैं सही था,उन्होंने मुझे गलत बताया;
मैं सही था, उन्होंने मुझे बदलना चाहा;

मैं सच था, उन्होंने मुझे झूठा बताया;
मैं सच था, उन्होंने मुझसे सचाई को छुपाया;

मैं पूरा था, उन्होंने मुझे आधा बताया;
मैं पूरा था, उन्होंने मुझे कमी का एहसास कराया;

आज जब मैंने अपने आप को बीते हुए कल से कुछ जुदा पाया;
तो आईना दिखा कर उन्होंने मेरे कल से मुझे रूबरू करवाया।


  1. Nothing short of brilliant man... never thought u cud write so beautifully... awesome...

  2. wow man!!..u write amazing stuff...never got an insight into this hidden talent of urs...

  3. Oh Thanks!
    BTW we are following your blog in Anticipation... So plz start blogging...

  4. awesome bro...awesome poetry!!!..really good..keep it up!!

  5. अच्छी सरल कविता लिखी है आपने. एक सुझाव :

    अगर कविता की आख़िरी लाइन ऐसे लिखे तो कविता का सार उभर आएगा.

    "तो आईना दिखा कर उसने मेरे कल से मुझे रूबरू करवाया "

    लिखते रहे ...बूँद बूँद से सागर भरता है .

  6. @Seth: Thanks Bro.

    @Gee: Thanks So Much.



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