F.R.I.E.N.D.S.

Monday, April 16, 2012

~ SHABDON KA DUKANDAAR ~

शब्दों की आज मैं दुकान लगा कर बैठा हूँ,
कुछ लिखवाना है तो लिखवा लो, सुबह से यूँ ही तन्हा परेशान बैठा हूँ..

हाँ हैरान हूँ आने जाने वाले खरीददारों से,

बोलते हैं लिखवा तो लें पर क्या भरोसा तुम कैसा लिखो?
खुद गुम हो बैठे, डर है कहीं वैसा ना लिखो..

... मैंने भी कह दिया शान से,
के चुप हूँ मैं लेकिन मेरी कलम खूब बोलती है,
खुद आजमा कर देखिये कि शब्दों के लिबास में आपकी भावनाओं को कैसे तौलती है..

हिचकिचाकर कर बोले साहब,
चलो फ़िलहाल पाव भर भावनाओं के लिए ही शब्द मोल देदो,
देखो ठीक लगा लेना दाम, नहीं तो बस फिर रहने दो..

मैंने कहा साहब बोहनी का समय है तो बिलकुल वाजिब दाम में ही दूंगा,
आज आप पहले खरीददार हैं, तो कुछ मुनाफा भी नहीं लूँगा..

दिल से मैं लिखता हूँ.. तो जो दिल करे वो दे जाना,
और अगर हो सके तो मेरे शब्दों को दूर तलक ले जाना..
हो सके तो मेरे शब्दों को दूर तलक ले जाना.



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Hi Friends.. There is a lot much going in my life but somehow i am not able to pen down any of it..


I still remember my exam days.. Whenever i fell short of words or lazy to write down anything big as an answer then i simply used to write down the whole answer in points.. So following are the main points of my life these days -


  • I am planning to take a break from the job.
  • I am working on a short movie :: "PAGLA WRITER" as AmaChor Productions.
  • I want to earn money from photography & don't know how i am gonna do this.

P.S. 
My FB friends must have read it already but never mind guys DO drop a comment here.. :)